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Happy New Years to All Faltu Bazaar Family

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Amazing Funny Stories

एक नवविवाहित युवक अपनी पत्नी को अपनी पसंदीदा जगहों की सैर करा रहा था, सो, वह पत्नी को उस स्टेडियम में भी ले गया, जहां वह क्रिकेट खेला करता था...अचानक वह पत्नी से बोला, `क्यों न तुम भी बल्ले पर अपना हाथ आज़माकर देखो... हो सकता है, तुम अच्छा खेल पाओ, और मुझे अभ्यास के लिए एक साथी घर पर ही मिल जाए...`पत्नी भी मूड में थी, सो, तुरंत हामी भर दी और बल्ला हाथ में थामकर तैयार हो गई...पति ने गेंद फेंकी, और पत्नी ने बल्ला घुमा दिया...इत्तफाक से गेंद बल्ले के बीचोंबीच टकराई, और स्टेडियम के बाहर पहुंच गई...पति-पत्नी गेंद तलाशने बाहर की तरफ आए तो देखा, गेंद ने करीब ही बने एक सुनसान-से घर की पहली मंज़िल पर बने कमरे की खिड़की का कांच तोड़ दिया है...अब पति-पत्नी मकान-मालिक की गालियां सुनने के लिए खुद को तैयार करने के बाद सीढ़ियों की तरफ बढ़े, और पहली मंज़िल पर बने एकमात्र कमरे तक पहुंच गए...दरवाजा खटखटाया, तो भीतर से आवाज़ आई, `अंदर आ जाओ...`जब दोनों दरवाजा खोलकर भीतर घुसे तो हर तरफ कांच ही कांच फैला दिखाई दिया, और उसके अलावा कांच ही की एक टूटी बोतल भी नज़र आई...वहीं सोफे पर हट्टा-कट्टा आदमी बैठा था, …

Nice Short Story

New Nice Story Only For You.

एक बेटी ने जिद पकड़ ली "पापा मुझे
साइकिल चाहिये !
..
..
पापा ने कहा अगले महीने दिवाली
पर जरुर साईकल
लाउंगा ! प्रॉमिस !
.
.
एक महीने बाद... पापा , मुझे
साइकिल चाहिये , आपने प्रॉमिस
किया था ... !
.
.
वह चुप रहा ...
शाम को दफ्तर से लौटा बेटी
तितली की तरह खुश हुई व़ाह ! थॅंक्स
पापा , मेरी साइकिल के लिये
अगले दिन.... पापा ! आपकी उंगली
की सोने की अंगूठी कहाँ गई .?
.
.
बेटा ! सच बोलूँगा ... कल ही बेच दी
तुम्हारी साइकिल के लिये .....!
.
.
बेटी रोते हुए , पापा, ! पैसों की
इतनी दिक्कत थी तो मत लाते .....
.
.
नहीं खरीदता तो मेरी प्रॉमिस
टूटती
तुम्हे फिर मेरे किसी वादे पे
विश्वास नहीं होता .
तुम यही समझती कि "प्रॉमिस
तोड़ने के लिये
किये जाते है !"
.
.
मेरी अंगूठी दूसरी आ जायेगी
मगर "टूटा हुवा विश्वास
छूटा हुवा बचपन दोबारा नहीं
लौटेंगे !"
जाओ !
साइकल चलाओ !....

अपने से ज्यादा अपनी बेटी की
ख़ुशी चाहने वाले पिता के लिये।
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तांत्रिक बोध साधना और साहित्य हिंदी पुस्तक | Tantrik Bodh Sadhana Aur Sahitya Hondi Book

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कोहरे में डूबा शहर- डॉ नरेन्द्र मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Kohre Mein Duba Sehar- Dr. Narendra Hindi Book Free Download

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Faltu Bazaar के सभी पाठक को दशहरा की हार्दिक शुभ कामनाये

मूल नाम : दशहरा

अन्य नाम : विजयादशमी ,बिजोया ,आयुधपूजा। 
प्रकार : धार्मिक और सामाजिक 
उद्देश्य : धार्मिक निष्ठां , उत्सव , मनोरंजन 
तिथि : आश्विन दशमी 
अनुष्ठान : रामलीला , रावणदहन ,आयुध-दहन 
सामान पर्व : नवरात्री 


विजया दशमी भारत का बहुत ही प्रसिद्द त्यौहार है। जो हम क्यों मनाते है आप सब को पता है. की आजके दिन राम ने रावण का वध किया था।,आज ही के दिन बुराई के ऊपर अच्छाई की जित हुई थी  जिसको हम थोड़ा विस्तार से जानते है 
विजयदशमी अथवा दशहरा 
भूमिका : दशहरा शरद ऋतु में आने वाला त्योहार है यह आश्विन मास की सुक्ल पक्ष  की दशमी को मनाया जाता है।  आज ही के दिन राम ने लंका पति रावण का वध किया था इसलिए ये दिन मनाया जाता है। ये त्यौहार सिर्फ हिन्दू ही नहीं सब जाती के लोग मनाते है ये त्यौहार खास करके क्षत्रिय लोगो के लिए खास माना जाता है। और क्षत्रिय लोग आजके दिन शस्त्र पूजन करते है।

राम का लंका  विजय : जैसे की हमको पता है की राम ने १४ वर्ष तक वनवास बिताया।  बनवास के दौरान रावण ने सीता माता का हरण कर लिया था। तब भगवन श्री राम ने हनुमान और सुग्रीव की मदद से लंका पर युद्ध किया ये एक भयंकर युद्ध चला म…

गुजरात की लोककथा | जटा हलकारा / झवेरचंद मेघाणी

गुजरात की लोककथा

जटा हलकारा / झवेरचंद मेघाणी


नपुंसक पति की घरवाली-सी वह शोकभरी शाम थी। अगले जन्म की आशा के समान कोई तारा चमक रहा था। अंधेरे पखवाड़े के दिन थे।

ऐसी नीरस शाम को आंबला गांव के चबूतरे पर ठाकुरजी की आरती की सब बाट देख रहे थे। छोटे-छोटे अधनंगे बच्चों की भीड़ लगी थी। किसी के हाथ में चांद-सी चमकती कांसे की झालर झूल रही थी तो कोई बड़े नगाड़े पर चोट लगाने की प्रतीक्षा कर रहा था। छोटे-छोटे बच्चे इस आशा से नाच रहे थे कि प्रसाद में उन्हें मिस्री का एकाध टुकड़ा, नाररियल की एक-दो फांकें तथा तुलसी दल से सुगंधित मीठा चरणमृत मिलेगा। बाबाजी ने अभी तक मंदिर को खोला नहीं था। कुंए के किनारे पर बैठे बाबाजी स्नान कर रहे थे।

बड़ी उम्र के लोग नन्हें बच्चों को उठाये आरती की प्रतीक्षा में चबूतरे पर बैठे थे। सब चुप्पी साधे थे। उनके अंतर अपने आप गहरारई में ब्ैठते जा रहे थे। यह ऐसी शाम थी।

बड़ी उदास थी आज की शाम। अत्यंत धीमी आवाज में किसी ने बड़े दु:ख से कहा, "ऋतुएं मंद पड़ती जा रही है।"

दूसरा इस दु:ख में वृद्वि करते हुए बोला, "यह कलियुग है। अब कलियुग में ऋतुएं खिलती नहीं हैं। खिलें तो कैसे…